डगर है मुश्किल कठिन सफ़र है
मगर मुसाफिर जगा नहीं है
जो सोएगा बस वही खोएगा
ये बात उसको पता नहीं है
डगर है मुश्किल कठिन सफ़र है
मगर मुसाफिर जगा नहीं है..
लगेंगे फल जब किसी वृक्ष पर
वो पेड़ झुक जाएंगे स्वतः ही
अकड़ तने की बता रही है
अभी फल इसमें लगा नहीं है
डगर है मुश्किल कठिन सफ़र है
मगर मुसाफिर जगा नहीं है..
जो खानदानी रईस है वो
मिजाज रखते हैं नर्म अपना
तुम्हारा लहजा बता रहा है
तुम्हारी दौलत नई नई है
डगर है मुश्किल कठिन सफ़र है
मगर मुसाफिर जगा नहीं है..
ज़रा सा कुदरत ने क्या नवाज़ा
के आके बैठे हो पहली शफ़ में
अभी से उड़ने लगे हवा में
अभी ये शोहरत नई नई हैं
डगर है मुश्किल कठिन सफ़र है
मगर मुसाफिर जगा नहीं है....

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