हे बुद्धि के दाता सब वेदों के ज्ञाता
तुम्हें वंदना तुम्हें वंदना..
एक दंत दयावंत चार भुजा धारी
माथे पर सिंदूर शोभे मुस की सवारी
मैया तुम्हें बुलावे गौरा तुम्हें बुलावे
कह कह के ललना
तुम्हें वंदना तुम्हें वंदना....
पान चढ़े फूल चढ़े और चढ़े मेवा
लड्डुवन के भोग लगे संत करें सेवा
भोले बाबा तुम्हें सुलावे
शंकर बाबा तुम्हें सुलावे
रेशम के पलना
तुम्हें वंदना तुम्हें वंदना....
अन्धन को आंख देवे कोढ़ीन को काया
बाँझन को पुत्र देवे निर्धन को माया
दिनों की बिनती को
भक्तों की विनती को
अब गणपति जी सुनना
तुम्हें वंदना तुम्हें वंदना.....

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