कई लाखों तर गए हैं
तेरा नाम जपते जपते..
ध्रुव ने तुम्हें उच्चारा प्रह्लाद ने पुकारा
नारद तो तर गए हैं गुणगान करते-करते
बाली भी तर गया है सुग्रीव भी तरा
रावण तो तर गया है संग्राम करते-करते
गणिका भी तर गई है शबरी भी तर गई है
अज़मील तो तर गया था सुत नाम लेते-लेते
दृष्टि दया की फेरों हमको भी तो निहारो
जन्मों से आ रहे हैं, तेरे द्वार आ गए हैं
तेरा नाम जपते जपते
कई लाखों तर गए हैं
तेरे नाम जपते-जपते....

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