सब में कोई ना कोई दोष रहा लिरिक्स / sab me koi na koi dosh rha lyrics

सब में कोई ना कोई दोष रहा 

एक विधाता निर्दोष रहा..


वेद शास्त्र का पंडित ज्ञानी 

रावण था पर था अभिमानी 

शिव जी का भक्त होकर सिया चुरा कर 

कर बैठा ऐसी नादानी

राम जी से हरदम रोष रहा 

एक विधाता निर्दोष रहा

सब में कोई ना कोई दोष रहा..


युधिष्ठिर धर्मपुत्र बलकारी

उनमें एब ज़ुए का भारी

भरी सभा में द्रोपदी पुकारे 

सुनकर भी वह धर्म पुजारी

बेबस और लाचार रहा 

एक विधाता निर्दोष रहा

सब में कोई ना कोई दोस्त रहा..


विश्वामित्र ने तप की कमाई 

सभी मेनका पर पर दी गवाई 

दुर्वासा जी महा ऋषि पर

उनमें भी थी एक बुराई 

हर समय क्रोध और जोश रहा 

एक विधाता निर्दोष रहा

सब में कोई ना कोई दोष रहा..

LB MUSIC ENTERTAINMENT

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