ऐसी है ललित प्यारी
लाल जू की प्राण प्यारी
ठीठहू न ठहराती कैसे के निहारियै
ऐसी है ललित प्यारी....
जाकी परछाई पर कोटि-कोटि चन्द आरु
दामिनी भामिनी काम कोटि-कोटि वारियै
काजर की रेख जहां पाननि की पिक भारी
और सुखुमारताई कैसे के बिचारियै
सहज ही अंग अंग रूप सर मोद मई
हित ध्रुव प्राण न्यौछावर कर डारियै
ऐसी है ललित प्यारी.....

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