अब देख के जी घबराता है 

सावन की सुहानी रातों को 

पिया छोड़ गए दिल तोड़ गए

अब आग लगे बरसातो को..


ऐ जान-ए-मोहब्बत जाने-ए-ग़ज़ल

आओ तो तुम्हारी नज़र करें 

आंखों में सज़ाए बैठे हैं 

हम प्यार भरी सौगातों को..


यूं प्यार की कसमें खा खा कर 

क्यूँ झूठी तसल्ली देते हों 

बस रहने दो हम जान गए

सरकार तुम्हारी बातों को..


मसला हुआ आंचल शानो पर,

 ये ज़ुल्फ की लट उलझी उलझी 

आँखो की खुमारी कहती

रहते हो कही तुम रातों को 


जुल्फों को हवा में लहराना,

 हॅंस हॅंस के तुम्हारा बल खाना 

अंदाज़ हैं सब दिल लेने के, 

हम जान गए इन बातों को..


बे-दर्द हसीनों की खातिर

क्यूँ होते हो बदनाम 'फना'

सफ़्फ़ाक़ सितम गर क्या समझें

हम दिल वालो की बातों को..

LB MUSIC ENTERTAINMENT