अपनो ने ग़म दिये तो मुझे याद गया
एक अज़नबी जो ग़ैर था
और ग़म गुशार था
अपनो ने ग़म दिये......
वो साथ था तो दुनिया के
ग़म दिल से दुर थे
ग़म दिल से दुर थे
खुशियों को साथ लेके
ना जाने वो कहा गया
एक अज़नबी जो ग़ैर था
और ग़म गुशार था
अपनो ने ग़म दिये......
अब ज़िन्दगी की कोई तमन्ना नहीं मुझें
अब ज़िन्दगी की कोई तमन्ना नहीं मुझें
तमन्ना नहीं मुझें.....
रौशन उसी के दम से हैं बुझता हुआ दिया
एक अज़नबी जो ग़ैर था
और ग़म गुशार था
अपनो ने ग़म दिये......
दुनिया समझ रही हैं जुदा मुझसे हो गया
जुदा मुझसे हो गया.....
नज़रो से दूर जा के भी
दिल से ना जा सका
एक अज़नबी जो ग़ैर था
और ग़म गुशार था
अपनो ने ग़म दिये......

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