मैं, मैं नहीं हूं फ़िर भी मुझे क्यूँ गुमान हैं
और जानने चला हु कि, ये क्या जहान हैं
दुनिया में जब मै आया, कोई नाम दे गया
जो भी मिला सफ़र कोई काम दे गया
मैं, मै हूं कि मैं ओ हूं.....
मेरा क्या मक़ाम हैं
मैं, मैं नहीं हूं फ़िर भी मुझे क्यूँ गुमान हैं...
माँ बाप ने सिखाया कि अच्छा हैं क्या बुरा
कुछ और सीखता रहा ना जाने क्या हुआ
देखा तो लगा ये बुरी, दुनिया तमाम हैं
मैं, मैं नहीं हूं फ़िर भी मुझे क्यूँ गुमान हैं...
जिसने हमें हैं भेजा उसे, सभी हैं खबर
ये वक़्त जो हैं दर्द भरा जाएगा गुजर
परवर दिगार पर ये मुझें एहतराम हैं
मैं, मैं नहीं हूं फ़िर भी मुझे क्यूँ गुमान हैं...

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