भूल गया मानव मर्यादा जब कलयुग की हवा चली लिरिक्स / Bhul Gya Manav Maryada Jab Kalyug Ki Hawa Chali Bhajan lyrics

भूल गया मानव मर्यादा

जब कलयुग की हवा चली

धूप कपूर बीके ना नारियल

मदिरा बिक रही गली गली..


मर्यादा ना करें बड़ों की 

मदिरा पिए भरे चिलमे

रामायण गीता ना बाँचे

दिल से देख रहे फ़िल्में 

साँची बात लगे हृदय में 

सबसे कह रहे बात भली

धूप कपूर बीके ना नारियल

मदिरा बिक रही गली गली..


नारी अब निर्लज्ज भई 

नर पाप की सीमा लाँघ गए

कलयुग का तो फ़ैशन है 

 बिटिया के दुपट्टा खोल भए

धर्म कर्म और शर्म नहीं हैं 

कलयुग हो गया बहुत बली

धूप कपूर बीके ना नारियल

मदिरा बिक रही गली गली..


मात पिता की सेवा कर लो 

स्वर्ग मिले ईश्वर कह रहे

सत्य वचन है ये ईश्वर के 

उनपे ध्यान नहीं दे रहे

ध्यान दे रहे वहाँ जहां पर 

नट नारी की कमर हली

धूप कपूर बीके ना नारियल

मदिरा बिक रही गली गली..

LB MUSIC ENTERTAINMENT

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