कौशल के भूपति कुटिया में सोए
देख लखन जी तो जी भर के रोए
कौशल के भूपति कुटिया में सोए..
लिखा जो मुकद्दर में मिटाना है मुश्किल
लिखा जो नहीं है तो पाना भी मुश्किल
कोई खो के पाए तो, कोई पा के खोए..
कोई पा के खोए
कौशल के भूपति कुटिया में सोए..
जहां ब्रह्म को भी सहना पड़ा दुख
वहां जीव को क्या कब दुख है कब सुख
फ़िर दुख में काहे तू पलके भिगोए
पलके भिगोए....
कौशल के भूपति कुटिया में सोए..

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