श्याम नाम की ओढ़ चुनरिया
जित चाहे इत उत डोल
प्रेम से राधे राधे बोल
प्रेम से राधे राधे बोल
ये चुनरी मीरा ने ओढ़ी
प्रेम दीवानी भई निगोड़ी
जहर का प्याला पी गई मीरा
राणा ने दिया घोल
प्रेम से राधे राधे बोल....
ये चुनरी प्रह्लाद ने ओढ़ी
तब ही प्रभु ने शक्ति छोड़ी
खंभा फाड़े हिरणाकुश मारे
अपनी बिठा कर गोद
प्रेम से राधे राधे बोल..
ये चुनरी द्रौपदी ने ओढ़ी
चिर बढ़ाये कसर ना छोड़ी
मनमोहन श्री श्याम सुंदर की
लीला बड़ी अनमोल
प्रेम से राधे राधे बोल..
ये चुनरी नरसी ने ओढ़ी
भात भराया कसर ना छोड़ी
सेठ बने जब सांवरिया
तब दिए ख़ज़ाने खोल
प्रेम से राधे राधे बोल....

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