चार दिन की फ़क़त चांदनी है लिरिक्स Ghazal: Char Din Ki Fakat Chandani Hai Chandani Ka Bharosa Nahi Hai lyrics

चार दिन की फ़क़त चांदनी है 

चांदनी का भरोसा नहीं है

इसलिए हूं अंधेरों का शैदा 

रोशनी का भरोसा नहीं है...


कितने घरों के दियो को बुझाकर

क्यों मनाता है नादान दिवाली

जिंदगी पर अरे मरने वालों...2

जिंदगी का भरोसा नहीं है..

चार दिन की फ़क़त....


पहले ख़ुद्दारिया तो देखो 

फिर मुझे शौक़ से गालियां दो 

दुश्मनी इसलिए कर रहा हूं....2

 दोस्ती का भरोसा नहीं है....

चार दिन की फ़क़त....


बिजली चमके तो जग सारा देखें 

और गिरती है ये एक ही पर

जी कली से चमन में है रौनक...2

उस कली का भरोसा नहीं है....

चार दिन की फ़क़त.....

LB MUSIC ENTERTAINMENT

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