भोलेनाथ से निराला
गौरी नाथ से निराला
कोई और नहीं
कोई और नहीं कोई और नहीं
भोलेनाथ से निराला....
उनका डमरू डम डम बोले
अगम निगम के भेद खोले
ऐसा डमरू बजाने वाला
कोई और नहीं
भोलेनाथ से निराला कोई और नहीं....
काया जब-जब करवट बदले
पाप चमकते अगले पिछले
अब मुझको बचाने वाला
कोई और नहीं
भोलेनाथ से निराला कोई और नहीं....
तुमने जग का कष्ट मिटाया
मुझको स्वामी क्यों बिसराया
ऐसा भक्तों का रखवाला
कोई और नहीं
भोलेनाथ से निराला कोई और नहीं..

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