मन बस गयो नंदकिशोर
अब जाना नहीं कहीं और
बसा लो वृंदावन में बसा लो वृंदावन में..
सौप दिया अब जीवन तोहे
राखो जिस विधि रखना मोहे
तेरे दर पर पड़ी हूं सब छोड़
तेरे दर पर पड़ी हूं सब छोड़
अब जाना नहीं कहीं और
बसा लो वृंदावन में बसा लो वृंदावन में..
चाकर बनकर सेवा करूंगी
मधुकरी मांग कलेवा करुंगी
तेरा दरस करूंगी उठ भोर
तेरा दरस करूंगी उठ भोर
अब जाना नहीं कहीं और
बसा लो वृंदावन में बसा लो वृंदावन में..
अर्ज मेरी मंजूर ये करना
वृंदावन से दूर न करना
काहे मधुप हरि जी हाथ जोड़
अब जाना नहीं कहीं और
बसा लो वृंदावन में....

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Vikash Verma
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