पिला दे प्रेम का प्याला
प्रभु दर्शन की प्यासी हूं..
छोड़कर भोग दुनिया के
योग के पंथ में आई
तेरे दीदार के कारण..2
फिरू बन बन उदासी हूं
पिला दे प्रेम का प्याला
प्रभु दर्शन की प्यासी हूं..
ना जानू ध्यान का धरना
ना करना ज्ञान चर्चा का
नहीं तप योग है केवल..2
तेरे चरणों की दासी हूं
पिला दे प्रेम का प्याला
प्रभु दर्शन की प्यासी हूं..
ना देखो दोष को मेरे
दया की फेर दृष्टि को
ना दूजा आसरा मुझको..2
तेरे दर की निवासी हूं
पिला दे प्रेम का प्याला
प्रभु दर्शन की प्यासी हूं..
कोई बैकुंठ बतलावे
कोई कैलाश पर्वत को
वो ब्रह्मानंद घट घट में..2
रूप की मैं दिलासी हूं
पिला दे प्रेम का प्याला
प्रभु दर्शन की प्यासी हूं..

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