हो मै तो जीती हूं तोहरे दम से
काहे रे बनाई झूठी बतिया हमसे..
सैया मोरे भूल ना जाना
मुझ बिरहन को यूं ना सताना
हमरा नाता हैं जनम जनम से
काहे रे बनाई झूठी बतिया हमसे..
सौतन की गलियों से तुम हो आए
अखियां तेरी भेद बताए
मैं तो मर गई हूं तोहरे ग़म से
काहे रे बनाई झूठी बतिया हमसे..

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