कैसे ढूंढो मैं रघुवर पता आपका
रूप माया लिया जब घनी रात का
कैसे ढूंढो मैं रघुवर पता आपका..
मन भटकते भटकते परेशान हैं..2
अब तो केवल बचा आसरा आपका
रूप माया लिया जब घनी रात का
कैसे ढूंढो मैं रघुवर पता आपका..
सुनता हूँ उसका जीवन सवर जाता है..2
जिसपे होती करम कि नज़र आपका
रूप माया लिया जब घनी रात का
कैसे ढूंढो मैं रघुवर पता आपका..
अपने चरणों से क्यूँ दूर रख्खा मुझे..2
आप ही से शिकायत करूँ आपका
रूप माया लिया जब घनी रात का
कैसे ढूंढो मैं रघुवर पता आपका..
अब तो मिलना हैं तुमसे जरूरी बहुत..2
एल बी से है दूरी बहुत आपका
रूप माया लिया जब घनी रात का
कैसे ढूंढो मैं रघुवर पता आपका..

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