बेकार की बातों में आया ना कीजिए
जिसमें ना भक्ति रस हो गाया ना कीजिए
बेकार की बातों में आया ना कीजिए..
जो ना लगा सको तुम जीवन में कोई बाग़
तो आग भी जीवन में लगाया ना कीजिए
जिसमें ना भक्ति रस हो गाया ना कीजिए
बेकार की बातों में आया ना कीजिए..
अगर बाट सको जग का दुःख बाटते चलो
धोखे से किसी दिल को दुखाया ना कीजिए
जिसमें ना भक्ति रस हो गाया ना कीजिए
बेकार की बातों में आया ना कीजिए..
प्रभु सामने हो तेरे दिखे नहीं तुझे
माया में ऐसे मन को फसाया ना कीजिए
जिसमें ना भक्ति रस हो गाया ना कीजिए
बेकार की बातों में आया ना कीजिए..
सत्कर्म नहीं अन्दर दिखाता है किस लिए
यूँ फूक से पर्वत को उड़ाया ना कीजिए
जिसमें ना भक्ति रस हो गाया ना कीजिए
बेकार की बातों में आया ना कीजिए..

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