भजन से दिल ना चुराना
कि हाय राम
ज़िंदगी का कौन ठिकाना..
यह तन है माटी का पुतला
ठेस लगे गिर जाना
ठेस लगे गिर जाना
कि हाय राम
ज़िन्दगी का कौन ठिकाना..
यह तन है जंगल की लकड़ी
आग लगे जले जाना
कि हाय राम
ज़िन्दगी का कौन ठिकाना..
यह तन है कागज़ की पुड़िया
बूंद पड़े गल जाना
कि हाय राम
ज़िन्दगी का कौन ठिकाना..

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