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स्वपन स्वाहा हुए तो हवन हो गया
नयन झरने झरे आचमन हो गया
पीर लय में घुली आरती हो गई
दर्द को स्वर मिला तो भजन हो गया..
अब समय से मुझे रुठना है नहीं
भाग में जो मिला बात वो ही सही
काटे जितने मिले सब हृदय पर सहे
मेरा टूटा सा मन अब गगन हो गया
पीड़ा जितनी मिली सब संजो कर रखी
आंसुओं से ही मैने कहानी लिखी
गीत गाने की मुझको दिशा मिल गई
मेरा रोना ही मेरा नमन हो गया...
धूल माथे लगाई तिलक हो गया
टूटा सारा भरम मन सरल हो गया
मौन मेरा यहाँ प्रार्थना बन गया
दर्द को स्वर मिला तो भजन हो गया..
भस्म तन पर रमी मन अजर हो गया
काल का भय मिटा सब अमर हो गया
सास की लय जो ईश्वर से जाकर जुड़ी
अंत में शिव ही मेरा पिता हो गया..
हार को मैने माना वरण हो गया
टूटना ही यहाँ अब सृजन हो गया
मोह का हर भरम अब दहन हो गया
आज ख़ुद से ही मेरा मिलन हो गया..
हाथ खाली हुए तो नमन हो गया
ज़ख्म गहरा हुआ तो सहन हो गया
पीर संसार की जब पराई हुई
हार का हर कदम आचरण हो गया..
राह शिव की मिली तो मगन हो गया
शोर मन का मिटा तो शमन हो गया
आस शिव से जुड़ी वन्दना हो गई
मै शरण में गया तो अभय मिल गया..

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