कल भी मन अकेला था
आज भी अकेला है
जाने मेरी किस्मत ने
क्या-क्या खेल खेला है
कल भी मन अकेला था
आज भी अकेला है....
ढूंढते हो तुम खुशबू
कागजी गुलाबों में
प्यार सबको मिलता है
आज कल किताबों में
रिश्ते नाते झूठे सब
स्वार्थ का झमेला है
कल भी मन अकेला था
आज भी अकेला है....
जिंदगी के मंडप में
हर खुशी कवारी है
किससे से मांगने जाएँ
हर कोई भिखारी है
कह कहो की आंखों में
आंसुओं का रेला है
कल भी मन अकेला था
आज भी अकेला है....

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